भीख मांगता जानवर - लघु फिल्म स्क्रिप्ट

 


**शीर्षक: भीख (भीख माँगता जानवर)**  

**प्रकार: नाटक / सामाजिक संदेश**  

**अवधि: 10-12 मिनट**  


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**पहला दृश्य: (बाहर - व्यस्त शहर की सड़क - शाम)**  

*(कैमरा एक भारतीय बाजार के ऊपर घूमता है—कारों के हॉर्न, फेरीवाले और भागते हुए पैदल यात्री। शोर भरा माहौल।)*  


*(एक पतला, घायल आवारा कुत्ता एक खाने के स्टॉल के पास लँगड़ाता हुआ। उसकी आँखों में बेबसी। दुकानदार उसे भगाता है।)*  


**दुकानदार:**  

*(चिल्लाते हुए)*  

"हट्ट! जा इधर से!"  


*(कुत्ता कराहता है और गटर में खाने की तलाश में भटकता है।)*  


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### **दूसरा दृश्य: (बाहर - सड़क - रात)**  

*(एक छोटा लड़का, रोहन (10 साल, फटे कपड़े), दूर से कुत्ते को देखता है। उसके हाथ में आधी खाई हुई रोटी। उसका पेट गड़गड़ाता है।)*  


*(रोहन हिचकिचाता है, फिर रोटी का एक टुकड़ा तोड़कर कुत्ते की ओर फेंकता है। कुत्ता सूँघकर खा लेता है।)*  


**रोहन:** *(धीरे से)*  

"खा ले... मेरे पास भी ज्यादा नहीं है।"  


*(एकाएक एक लंबा आदमी (भीख माफिया का गुंडा) रोहन की बाँह पकड़ लेता है।)*  


**लंबा आदमी:**  

"तेरे को काम पर नहीं मिला आज? पैसे कहाँ हैं?"  


*(रोहन काँपने लगता है। कुत्ता कमजोर से गुर्राता है।)*  


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### **तीसरा दृश्य: (बाहर - पुल के नीचे - रात)**  

*(रोहन कुत्ते के साथ बैठा है, ठिठुर रहा है। वह उसकी फर को सहलाता है। कुत्ता उसका हाथ चाटता है।)*  


*(फ्लैशबैक: रोहन को उसके गाँव से उठाकर लाया जाता है, भीख माँगने के लिए मजबूर किया जाता है। लंबे आदमी की धमकियाँ गूँजती हैं।)*  


**लंबा आदमी (आवाज):**  

"भीख माँग, नहीं तो कुत्ते को मार डालूँगा!"  


*(रोहन आँसू पोंछता है, एक टूटा कटोरा उठाता है और सड़क की ओर बढ़ता है।)*  


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### **चौथा दृश्य: (बाहर - ट्रैफिक सिग्नल - अगला दिन)**  

*(रोहन कारों के पास भीख माँगता है। कुत्ता उसके पास लँगड़ाता है। एक महिला कार की खिड़की खोलती है।)*  


**महिला:** *(चिढ़कर)*  

"चलो हटो यहाँ से!"  


*(वह कार लेकर चली जाती है। रोहन उदास हो जाता है। कुत्ता उसका पैर धकेलता है।)*  


*(अचानक—लंबा आदमी आता है और कुत्ते को लात मारता है।)*  


**लंबा आदमी:**  

"तेरे को समझ नहीं आता? जोर से भीख माँग!"  


*(रोहन चीखता है जब आदमी डंडा उठाता है। कुत्ता भौंकता है और आदमी के पैर पर काटता है। अफरा-तफरी मच जाती है।)*  


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### **पाँचवाँ दृश्य: (बाहर - सड़क - अफरा-तफरी)**  

*(कुत्ता लड़ता है, लेकिन आदमी उसे पीटता है। रोहन एक पत्थर उठाता है—झिझकता है—फिर आदमी पर फेंकता है।)*  


*(भीड़ जमा हो जाती है। आदमी गालियाँ देता हुआ भाग जाता है। कुत्ता खून में लथपथ पड़ा है। रोहन रोता है, उसे गोद में उठाता है।)*  


**रोहन:** *(फुसफुसाते हुए)*  

"माफ कर दे... मैं डर गया था।"  


*(कुत्ते की साँसें धीमी होती हैं... फिर बंद हो जाती हैं। रोहन चीखता है।)*  


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### **अंतिम दृश्य: (बाहर - कब्र - सूर्यास्त)**  

*(रोहन कुत्ते को एक पेड़ के नीचे दफनाता है। वह टूटे कटोरे को निशानी के तौर पर रख देता है।)*  


*(वह उठता है, व्यस्त सड़क को देखता है—और अपना भीख का कटोरा छोड़कर चला जाता है।)*  


*(कैमरा कटोरे पर टिका रहता है। शहर की आवाज़ें बेरुखी से जारी रहती हैं।)*  


**काला पर्दा।**  


**स्क्रीन पर लिखा:**  

*"कुछ ज़िंदगियाँ रहम की भीख माँगती हैं। कुछ को वो भी नहीं मिलती।"*  


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**समाप्त।**  


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### **टिप्पणियाँ:**  

- **प्रतीकात्मकता:** कुत्ता रोहन की बेबसी को दर्शाता है—दोनों का शोषण, दोनों को भुला दिया गया।  

- **सामाजिक संदेश:** बच्चों से भीख मँगवाने वाले गिरोह और समाज की उदासीनता पर प्रकाश डालता है।  

- **भावनात्मक जुड़ाव:** कम संवाद, मजबूत दृश्यों के जरिए दर्द को दिखाया गया।  

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