Skip to main content
"Thoughts Shape Reality
मनुष्य संसार को बदलने का स्वप्न देखता है,
परंतु वह भूल जाता है कि संसार का निर्माण स्वयं के विचारों से होता है।
जब तक अंतर्मन शुद्ध नहीं होगा,
तब तक बाहरी संसार में शांति ढूंढना एक मृगतृष्णा मात्र है।
संसार में जो कुछ भी दिखाई देता है, वह केवल हमारे भीतर की ही प्रतिच्छाया है।"
By
@iRajaBabu
Comments
Post a Comment