Sher Ka Badla - Short Film Script

 



शेर का बदला

साउथ स्टाइल हिंदी फिल्म स्क्रिप्ट


ओपनिंग सीन

[स्क्रीन पर काला पर्दा, धीरे-धीरे एक गरज सुनाई देती है]

वॉयस ओवर (गहरी, भारी आवाज़): इस दुनिया में दो तरह के लोग होते हैं... शिकारी और शिकार। लेकिन जब शिकार को शेर का खून मिला हो... तो शिकारी को भी अपनी जान का डर होना चाहिए।

[तेज़ संगीत के साथ, स्लो मोशन में एक आदमी पीछे से दिखाई देता है, उसके लंबे बाल हवा में उड़ रहे हैं]


सीन 1: गाँव का दृश्य - दिन

[एक सुंदर गांव का दृश्य, जहां खेतों में किसान काम कर रहे हैं। बच्चे खेल रहे हैं। सुरेश (हमारा नायक) अपने छोटे भाई राजू के साथ खेत में काम कर रहा है।]

सुरेश: (पसीना पोंछते हुए) राजू, पानी ला दे भाई।

राजू: (मुस्कुराते हुए) बड़े भैया, आज तो आप थक गए! अरे, वो देखो, दीदी आ रही हैं!

[दूर से, पूजा (सुरेश की बहन) दौड़ती हुई आती है, उसका चेहरा चिंता से भरा है]

पूजा: भैया! भैया! वो लोग फिर से आ गए हैं! बाबूजी को धमकी दे रहे हैं!

सुरेश: (चेहरा सख्त होते हुए) कौन लोग?

पूजा: विक्रम के आदमी! वो हमारी जमीन हड़पना चाहते हैं!

[सुरेश अपनी कुदाल जमीन पर पटकता है और तेज़ी से घर की ओर भागता है]


सीन 2: सुरेश का घर - दिन

[सुरेश के पिता रामलाल, विक्रम के गुंडों से घिरे हुए हैं]

विक्रम का गुंडा 1: अरे बुड्ढे! तेरे पास सिर्फ एक हफ्ता है। या तो कागज़ पर साइन कर दे या फिर...

रामलाल: (दृढ़ता से) यह ज़मीन मेरे पूर्वजों की है। मैं इसे कभी नहीं बेचूँगा!

विक्रम का गुंडा 2: (रामलाल का कॉलर पकड़ते हुए) अब तो तेरा...

[सुरेश तेज़ी से अंदर आता है और गुंडे का हाथ पकड़ लेता है]

सुरेश: (आँखों में आग के साथ) मेरे पिता को हाथ लगाने की हिम्मत कैसे हुई?

विक्रम का गुंडा 1: (हँसते हुए) अरे देखो! छोटा शेर आ गया! तू जानता है विक्रम भाई किसे कहते हैं?

सुरेश: (शांत आवाज़ में) मुझे नहीं मालूम विक्रम कौन है, और न ही जानना चाहता हूँ। लेकिन तुम्हें यह जान लेना चाहिए कि सुरेश किसे कहते हैं।

[सुरेश अचानक गुंडे का हाथ मरोड़ देता है और उसे फर्श पर पटक देता है]

सुरेश: (गुस्से से) मेरे परिवार से दूर रहो! वरना अगली बार सिर्फ हाथ ही नहीं टूटेगा!

[गुंडे डरकर भाग जाते हैं]

गुंडा 2: (जाते-जाते) तू नहीं जानता तूने क्या कर दिया! विक्रम भाई तुझे जिंदा नहीं छोड़ेंगे!

सुरेश: (दहाड़ते हुए) फिर आना!


सीन 3: विक्रम का अड्डा - शाम

[विक्रम, शहर का सबसे बड़ा माफिया डॉन, अपने अड्डे पर बैठा है। उसके चारों तरफ गुंडे हैं।]

विक्रम: (शराब पीते हुए) तो उस किसान के बेटे में इतनी हिम्मत है?

गुंडा 1: (डरते हुए) हाँ भाई! वो बहुत खतरनाक है!

विक्रम: (हँसते हुए) एक मच्छर, शेर को चुनौती दे रहा है! मज़ा आएगा!

[विक्रम अपना गिलास तोड़ देता है]

विक्रम: जाओ, उसके परिवार को सबक सिखाओ! मैं जो ज़मीन चाहता हूँ, वो मेरी होगी!


सीन 4: सुरेश का घर - रात

[सुरेश अपने परिवार के साथ खाना खा रहा है। अचानक बाहर से शोर आता है।]

राजू: (डरकर) भैया, वो क्या आवाज़ है?

[सुरेश उठता है और बाहर जाता है। वहां विक्रम के 15-20 गुंडे दिखाई देते हैं। उनके हाथों में मशालें और हथियार हैं।]

विक्रम का मुख्य गुंडा: (चिल्लाते हुए) सुरेश! बाहर आ! तेरा खेल खत्म!

सुरेश: (शांत भाव से बाहर आते हुए) मैं यहीं हूँ। क्या चाहिए?

विक्रम का मुख्य गुंडा: विक्रम भाई का हुक्म है। या तो ज़मीन छोड़ दो, या फिर...

[अचानक गुंडे सुरेश के परिवार पर हमला कर देते हैं। सुरेश अकेले लड़ता है, लेकिन संख्या में ज्यादा होने के कारण वह हार जाता है। गुंडे उसके घर को आग लगा देते हैं और उसके पिता, माँ और भाई को मार डालते हैं। सुरेश घायल होकर गिर जाता है।]

विक्रम का मुख्य गुंडा: (हँसते हुए) विक्रम भाई के खिलाफ जाने का यही अंजाम होता है!

[गुंडे सुरेश को मरा हुआ समझकर वहां से चले जाते हैं। बारिश शुरू हो जाती है।]


सीन 5: जंगल - रात

[घायल सुरेश जंगल में घिसटता हुआ जा रहा है। वह एक पेड़ के नीचे गिर जाता है।]

सुरेश: (आंसू बहाते हुए) मैं... मैं बदला लूंगा... मैं हर एक को... हर एक को मौत दूंगा...

[अचानक, एक बूढ़ा आदमी (गुरुजी) वहां आता है]

गुरुजी: (सुरेश को देखते हुए) लगता है तुम्हारे अंदर अभी भी जिंदगी की लौ जल रही है।

सुरेश: (कमजोर आवाज़ में) मुझे... मुझे जीना है... बदला लेना है...

गुरुजी: (मुस्कुराते हुए) बदला? क्या तुम सच में बदला लेना चाहते हो? तब तुम्हें एक शेर बनना होगा, न कि सिर्फ एक आदमी।

[गुरुजी सुरेश को उठाकर अपने आश्रम ले जाता है]


सीन 6: मॉन्टेज - विभिन्न स्थान और समय

[तेज़ संगीत के साथ मॉन्टेज दिखाई देता है, जिसमें सुरेश गुरुजी के मार्गदर्शन में कठिन प्रशिक्षण लेता है। वह मार्शल आर्ट्स सीखता है, हथियार चलाना सीखता है, और शारीरिक रूप से बहुत मजबूत हो जाता है।]

गुरुजी (वॉयस ओवर): हर मनुष्य के अंदर एक शेर छिपा होता है। लेकिन उसे जगाने के लिए तुम्हें अपने इंसानी रूप को छोड़ना होगा। क्रोध तुम्हारी ताकत नहीं, बल्कि तुम्हारी कमजोरी है।

[सुरेश के बाल लंबे हो जाते हैं। उसका शरीर मजबूत हो जाता है। उसकी आँखों में अब एक नई चमक है।]


सीन 7: गुरुजी का आश्रम - दिन (5 साल बाद)

[एक नया सुरेश दिखाई देता है - मजबूत, लंबे बाल, और आँखों में एक खतरनाक चमक।]

गुरुजी: (सुरेश को देखते हुए) तुम तैयार हो। अब तुम एक शेर हो, एक इंसान नहीं।

सुरेश: (गहरी आवाज़ में) मेरी पहली मंजिल... विक्रम।

गुरुजी: (चेतावनी देते हुए) याद रखो, बदला तुम्हें अंदर से खोखला कर देगा। लेकिन न्याय... न्याय तुम्हें और दूसरों को शांति देगा।

सुरेश: (दृढ़ता से) मैं न्याय लाऊंगा, गुरुजी। हर एक अपराधी को सजा मिलेगी।


सीन 8: शहर का प्रवेश द्वार - शाम

[सुरेश एक मोटरसाइकिल पर शहर में प्रवेश करता है। यह वही शहर है जहां विक्रम राज करता है। सुरेश एक काले जैकेट में है, उसके लंबे बाल हवा में उड़ रहे हैं।]

सुरेश (मन में): मैं आ गया हूँ, विक्रम। अब तुम्हारा खेल खत्म होगा।


सीन 9: विक्रम का अड्डा - रात

[विक्रम अपने अड्डे पर बैठा है। पिछले 5 वर्षों में, वह और भी शक्तिशाली हो गया है। अब वह शहर का सबसे बड़ा अपराधी है, और राजनेताओं से भी उसके संबंध हैं।]

विक्रम: (शराब पीते हुए) मेरा नया प्रोजेक्ट शुरू करो! पूरे इलाके की जमीन मेरी होनी चाहिए!

[अचानक, एक गुंडा दौड़ता हुआ अंदर आता है]

गुंडा: (घबराया हुआ) भाई! छोटू, मनोज और राजू... वो सब मारे गए!

विक्रम: (गुस्से से) क्या? किसने मारा?

गुंडा: पता नहीं, भाई! कोई आदमी... लंबे बाल वाला... वो आया और... और...

[अचानक एक तेज़ आवाज़ होती है और बिजली चली जाती है। अंधेरे में, सिर्फ विक्रम के चेहरे पर मोमबत्ती की रोशनी दिखाई देती है।]

विक्रम: (चिल्लाते हुए) क्या हो रहा है?

[एक गहरी आवाज़ अंधेरे से आती है]

सुरेश की आवाज़: विक्रम... याद है मुझे?

[बिजली फिर से आती है, और सुरेश विक्रम के सामने खड़ा है। उसके पीछे, विक्रम के कई गुंडे जमीन पर पड़े हैं।]

विक्रम: (हैरान होकर) तू... तू कौन है?

सुरेश: (शांत आवाज़ में) मैं वही हूँ जिसे तुमने मरा हुआ छोड़ दिया था। मैं वही हूँ जिसके परिवार को तुमने मारा था। मैं शेर हूँ, जो अपना बदला लेने आया है।

[विक्रम डर जाता है और अपने बाकी गुंडों को इशारा करता है]

विक्रम: (चिल्लाते हुए) मारो इसे! मारो!

[एक्शन सीक्वेंस: सुरेश अकेले सभी गुंडों से लड़ता है। उसके मूव्स बहुत तेज़ और शक्तिशाली हैं। वह एक-एक करके सभी गुंडों को मारता है। फाइट सीन में स्लो मोशन और तेज़ संगीत का इस्तेमाल होता है।]

सुरेश: (आखिरी गुंडे को मारने के बाद) अब सिर्फ तुम बचे हो, विक्रम।

[विक्रम पीछे हटता है और एक गन निकालता है]

विक्रम: (डरते हुए) रुक जा! मैं... मैं गोली मार दूंगा!

सुरेश: (विक्रम की तरफ बढ़ते हुए) मार दो। मुझे मौत का डर नहीं है। मैं तो पहले ही मर चुका हूँ।

[विक्रम गोली चलाता है, लेकिन सुरेश बचकर निकल जाता है और विक्रम के पास पहुंच जाता है।]

सुरेश: (विक्रम का गला पकड़ते हुए) मैं तुम्हें मारूंगा नहीं, विक्रम। मौत तुम्हारे लिए आसान होगी। मैं चाहता हूँ कि तुम पूरी जिंदगी जेल में सड़ो।

[सुरेश विक्रम को पकड़ लेता है और जेल भेज देता है।]


सीन 10: गाँव - दिन (कुछ समय बाद)

[सुरेश अपने गाँव लौटता है। वहां, वह अपने परिवार की कब्रों पर फूल चढ़ाता है।]

सुरेश: (आंसू बहाते हुए) मैंने आपका बदला ले लिया, बाबूजी। अब आप शांति से रह सकते हैं।

[सुरेश वहां से चलने लगता है। पीछे से, एक लड़की की आवाज़ आती है]

आवाज़: रुको!

[सुरेश मुड़ता है और देखता है कि पूजा, उसकी बहन, जिसे वह मरा हुआ समझ रहा था, वहां खड़ी है।]

पूजा: (आंसू बहाते हुए) भैया! आप जिंदा हो!

[सुरेश और पूजा एक-दूसरे को गले लगाते हैं]

सुरेश: (रोते हुए) तू... तू कैसे बची?

पूजा: उस रात मैं दीदी के घर गई थी। जब वापस आई तो... तो सब...

सुरेश: (पूजा को गले लगाते हुए) अब सब ठीक हो गया है, पूजा। अब हम फिर से एक परिवार की तरह रहेंगे।


सीन 11: शहर का मुख्य चौराहा - दिन

[सुरेश शहर के मुख्य चौराहे पर खड़ा है। उसके आसपास लोग इकट्ठा हो रहे हैं।]

सुरेश: (माइक पर बोलते हुए) मेरा नाम सुरेश है। मैं एक किसान का बेटा हूँ। आज मैं यहां एक वादा करने आया हूँ। इस शहर में अब कोई अपराध नहीं होगा। कोई भी गरीब, कमजोर का शोषण नहीं करेगा। अगर कोई ऐसा करेगा, तो उसे मुझसे सामना करना पड़ेगा।

[भीड़ तालियां बजाने लगती है]

भीड़ का आदमी: लेकिन तुम अकेले क्या कर लोगे?

सुरेश: (दृढ़ता से) मैं अकेला नहीं हूं। मेरे साथ न्याय है। और जहां न्याय होता है, वहां शेर का बदला पूरा होता है!

[कैमरा धीरे-धीरे ऊपर जाता है, और सुरेश के चारों ओर इकट्ठा भीड़ को दिखाता है। बैकग्राउंड में एक शेर की दहाड़ सुनाई देती है।]

समाप्त


पोस्ट-क्रेडिट सीन

[एक अंधेरे कमरे में, एक आदमी (सुपर-विलेन) बैठा है। उसका चेहरा नहीं दिखाई देता।]

अनजान आदमी: (फोन पर बात करते हुए) तो विक्रम हार गया? कोई बात नहीं। उसके जैसे हजारों हैं मेरे पास। इस सुरेश को बताओ कि असली खेल अभी शुरू हुआ है।

[स्क्रीन पर "शेर का बदला 2 - जल्द आ रहा है" लिखा आता है]


प्रमुख डायलॉग्स

  1. "इस दुनिया में दो तरह के लोग होते हैं... शिकारी और शिकार। लेकिन जब शिकार को शेर का खून मिला हो... तो शिकारी को भी अपनी जान का डर होना चाहिए।"
  2. "मुझे नहीं मालूम विक्रम कौन है, और न ही जानना चाहता हूँ। लेकिन तुम्हें यह जान लेना चाहिए कि सुरेश किसे कहते हैं।"
  3. "हर मनुष्य के अंदर एक शेर छिपा होता है। लेकिन उसे जगाने के लिए तुम्हें अपने इंसानी रूप को छोड़ना होगा।"
  4. "मैं तुम्हें मारूंगा नहीं, विक्रम। मौत तुम्हारे लिए आसान होगी। मैं चाहता हूँ कि तुम पूरी जिंदगी जेल में सड़ो।"
  5. "मैं अकेला नहीं हूं। मेरे साथ न्याय है। और जहां न्याय होता है, वहां शेर का बदला पूरा होता है!

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